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वाराणसी: जेल बना धन वसूली का अड्डा

पूर्व के दिनों में जेलर को शौचालय में बंद कर पीटा गया था


भ्रष्टाचार में डूबे साहब गजब मचा है धमाल

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो, वाराणसी (संपादक कृष्णा पंडित)

वाराणसी : कारागार या बन्दी गृह (जेल) वह स्थान या भवन है जिसमें राज्य द्वारा विचाराधीन अपराधियों या अपराध-सिद्ध अपराधियों को बन्दी बनाकर रखा जाता है। वाराणसी जिला जेल 750 की क्षमता, ढाई हजार बंदी और मुट्ठी भर फोर्स, आए दिन होती हैं छिटपुट घटना। वाराणसी जिला जेल में जबरदस्त धन उगाही, जेल अधीक्षक उमेश सिंह पर लगा भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप।  

बंदी द्वारा जेल सुविधा शुल्क न देने पर जिला कारागार में मिलने गए बंदी के अधिवक्ता से हुआ बदसलूकी जेल पुलिस व कारागार राइटर द्वारा किया गया दुर्व्यवहार

पीड़ित अधिवक्ता ने जिला जज सहित पुलिस आयुक्त, गृह मंत्रालय, डीजी जेल व मानवाधिकार आयोग में प्रार्थना पत्र देकर लगाया गुहार

अधिवक्ता का आरोप कैदियों से मुलाकात करने पर 500 रुपये की जबरदस्ती होती है वसूली

मनचाहे बैरक में ट्रांसफर करने को लेकर भी होती है 2100 रुपए वसूली का आरोप

अधिवक्ता ने प्रार्थना पत्र में जेल के अंदर लगे सभी सीसीटीवी फुटेज की जांच कर कार्रवाई करने की मांग 

जिला जज ने D.L.S.A.( जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ) को दिया जांच का आदेश..

उत्तर प्रदेश के जेलों में जेल अधीक्षक द्वारा बंदियों से मनमानी वसूली का यह नया मामला नहीं है ..

सन 2014 में वाराणसी जेल में जेल अधीक्षक द्वारा वसूली अपने चरम सीमा पर था बंदियों से मन माफिक मोटी रकम लेने के बाद ही बैरक में स्थानांतरण होता था ! अपहरण ,हत्या दुष्कर्म ,लूट जैसे मामलों में गए कैदियों के साथ इस तरह यातना दी जाती थी की अंग्रेजी शासन याद आ जाए इस भयंकर यातनाओं के कारण जेल में दंगा हुआ और जेलर आशीष तिवारी को शौचालय में बंद करके पीटा गया ! 

प्रशासनिक अधिकारियों के मान मनौवल के बाद कैदियों ने आशीष तिवारी को छोड़ा और वह भी इस शर्त पर की अभी तुरंत इसका स्थानांतरण अन्य जेल में किया जाए इसके बाद वाराणसी जेल में बंदियों के लिए बहुत सुधार हुआ जो कई सालों तक जेल में शांति व्यवस्था बनाए रखा पर वर्तमान में वाराणसी, जौनपुर व पूर्वांचल के कई जिलों में मनमानी वसूली का समाचार बराबर मिल रहा है अभी कुछ वर्ष पूर्व जेल में कई कैदियों की आकस्मिक मौत भी जेल अधीक्षक के कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं ? वर्तमान में जौनपुर जेल से भी विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से खबर बाहर आ रही है कि ₹25000 की मोटी रकम लेने के बाद हत्या आरोपियों को प्रताड़ना से मुक्ति मिली इसी प्रकार वाराणसी जेल में प्रथम मुलाकात पर ₹500 और उसके बाद हर मुलाकात पर 250 रुपए बंदी रक्षकों द्वारा जेल अधीक्षक के सह पर बांध दिया गया है  जिस बंदी द्वारा सुविधा शुल्क नहीं दिया जाता है उसके मुलाकाती को जेल के बाहर से ही भगा दिया जाता है ! अगर इस मामले को संज्ञान में नहीं लिया गया तो सन 2014 वाराणसी जेल दंगा की पुनरावृत्ति कभी भी हो सकती है !

वाराणसी जिला जेल में बंदियों के अराजक होने का एक कारण यह भी है कि बैरक में क्षमता से अधिक कैदियों को रखा गया है, उन पर निगरानी के लिए बंदी रक्षकों की एक अरसे से कमी है। 747 बंदियों की क्षमता वाले जिला जेल में इस समय 2514 बंदी निरुद्ध हैं।

50 बंदियों की क्षमता वाले बैरक में 150  बंदियों को ठूंस कर भरा गया है, लिहाजा आए दिन छिटपुट घटनाएं होती रहती हैं। वहीं, बंदी रक्षकों की संख्या कम होने के कारण निगरानी व्यवस्था में ढिलाई रहती है। मुट्ठी भर फोर्स में सिर्फ 95 बंदी रक्षक हैं। जेल अधीक्षक एक, तीन डिप्टी जेलर और 95 बंदी रक्षक के अलावा अस्पताल के चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ की भी संख्या कम है।

लंबे अरसे से हो रही मैन पावर बढ़ाने की मांग....

कार्यालय में काम करने वाले बाबुओं की भी दरकार है। कई बार प्रस्ताव बनाकर जिला जेल प्रशासन की ओर से मुख्यालय को भेजा गया, लेकिन अब तक जेल का मैन पावर नहीं बढ़ सका। यही वजह है कि जब भी घटनाएं होती है तो फिर उन्हें काबू करना आसान नहीं होता है !!

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