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खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन की दिशा में की गई नई पहल

जनपद में मिट्टी के 17 हजार नमूने जमा होंगे



पूर्वांचल राज्य ब्यूरो, बलिया 

बलिया। कृषि विभाग की ओर से खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन की दिशा में नई पहल करते हुए मृदा (मिट्टी) परीक्षण की तैयारी शुरू कर दी गयी है। मृदा परीक्षण के लिए जिले के 170 गांवों से नमूने लिए जायेंगे। मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर मिट्टी की सेहत में सुधार किए जाने को लेकर कृषि विभाग प्रयासरत है। उप निदेशक कृषि मनीष कुमार सिंह ने बताया कि प्रत्येक ब्लॉक के 10 गांवों को चिह्नित किया गया है, जहां से 100 नमूने लिये जायेंगे। इसके बाद मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में जांच किया जायेगा। बताया कि रसायनिक खादों के ज्यादा प्रयोग से मिट्टी बीमार हो रही है और खेतों में आर्गेनिक कार्बन न्यूनतम स्तर (0.25 प्रतिशत) पर पहुंच गया है। कुछ क्षेत्रों में जिंक, सल्फर की मात्रा भी काफी कम है, जिससे पौधे कुपोषित हो रहे हैं। इसके कारण उत्पाद कम हो रहा है और लागत बढ़ती जा रही है। उप निदेशक ने बताया कि नमूनों के जांच के लिए गांवों की आईडी प्रदेश मुख्यालय से बनायी गयी है। जांच के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिया जायेगा। साथ ही विशेषज्ञ उन्हें मृदा में कमी वाले रसायन डालने की सलाह देंगे।

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बलिया। सोहांव कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सोमेन्द्र ने बताया कि मिट्टी में 12 पोषक तत्व होना जरूरी है, जिनमें आर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटैशियम, सल्फर, जिक, बोरान, आयरन, मैगनीज, कॉपर आदि शामिल हैं। पैदावार बढ़ाने के लिए मिट्टी में नाइट्रोजन 0.5 प्रतिशत, फास्फोरस 0.1 प्रतिशत और पोटैशियम 0.5 प्रतिशत होना चाहिए। फास्फोरस की कमी से जड़ें कमजोर हो जाती हैं। पोटैशियम की कमी से पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।

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