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शिक्षकों में योग शिक्षा तथा शारीरिक शिक्षा से ही स्वस्थ शरीर एवं स्वस्थ मस्तिष्क बनाया जा सकता : रामधारी राम

 


पूर्वांचल राज्य ब्यूरो, बलिया 

गाजीपुर/बलिया। स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गाजीपुर में पूर्व शोध प्रबन्ध प्रस्तुत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी महाविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ तथा विभागीय शोध समिति के तत्वावधान में महाविद्यालय के सेमिनार हाल में सम्पन्न हुई, जिसमें महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी व छात्र- छात्राएं उपस्थित रहे। उक्त संगोष्ठी में विज्ञान संकाय के शारीरिक शिक्षा एवं खेलकूद विषय के शोधार्थी रामधारी राम ने अपने शोध शीर्षक "शारीरिक शिक्षा एवं योग के प्रति शिक्षकों की मनोवृत्ति का अध्ययन" नामक विषय पर शोध प्रबन्ध व उसकी विषय वस्तु प्रस्तुत करते हुए कहा कि सामान्यतया आज शिक्षकों का जीवन भी शारीरिक एवं मानसिक विकृतियों एवं व्याधियों से ग्रसित होकर असहाय सा नजर आ रहा है तथा अपने मन का भटकाव व मूल्यों के पालन में असमर्थ होता जा रहा है। परिणामों से पता चलता है कि विभिन्न प्रकार के शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य में समान प्रवृत्ति है और उनका मानसिक स्वास्थ्य आम तौर पर बिगड़ रहा है। उनमें मनोविकृति के आयाम बदल रहे है जैसे शत्रुता कुंठा आदि। यह चिंताजनक निष्कर्ष शिक्षकों पर उच्च जोखिम वाले व्यावसायिक तनाव को दर्शा सकता है। खराब मानसिक स्वास्थ्य स्थिति वाले शिक्षक व्यावसायिक तनाव से पीड़ित हो सकते हैं, जैसे बार-बार बदलते नियामक ढांचे, बहुत सारे गैर-शिक्षण कार्य, प्रतियोगिताओं पर अत्यधिक जोर, शिक्षण में अत्यधिक केंद्रीकृत नियंत्रण और कम सामाजिक आर्थिक स्थिति।  ऐसे विषम परिस्थितियों में शिक्षकों में योग शिक्षा तथा शारीरिक शिक्षा का व्यावहारिक रूप से अनुप्रयोग कराना अति आवश्यक हो गया है, क्योंकि योग के व्यावहारिक अनुप्रयोग से ही स्वस्थ शरीर एवं स्वस्थ मन-मस्तिष्क बनाया जा सकता है। ऐसे में शिक्षक यदि अपने जीवन में योग शिक्षा के व्यावहारिक शिक्षक अनुप्रयोग को आत्मसात करें तभी उसके जीवन में सुख, स्वास्थ्य एवं शान्ति की किरण प्रस्फुटित होगी।  प्रस्तुतिकरण के बाद विभागीय शोध समिति, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ व प्राध्यापकों तथा शोध छात्र-छात्राओं द्वारा शोध पर विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछे गए जिनका शोधार्थी रामधारी राम ने संतुष्टिपूर्ण एवं उचित उत्तर दिया। तत्पश्चात समिति एवं अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के चेयरमैन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डा. राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने शोध प्रबंध को विश्वविद्यालय में जमा करने की संस्तुति प्रदान किया। इस संगोष्ठी में महाविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के संयोजक प्रो. डा. जी. सिंह, मुख्य नियंता प्रो एस डी सिंह परिहार, शोध निर्देशक  डा. ओमदेव सिंह गौतम एवं शारीरिक शिक्षा एवं खेलकूद  विभाग के विभागाध्यक्ष डा. लवजी सिंह के साथ शोध छात्र- छात्राएं आदि उपस्थित रहे।

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