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श्रीनाथ मठ भरौली के महंत ब्रह्मलीन, दी गई जल समाधि


पूर्वांचल राज्य ब्यूरो, बलिया  

बलिया। भरौली गांव के नाथ जी की मठिया के महंत स्वामी योगेन्द्र गिरि (90) वर्ष की अवस्था में ब्रह्मलीन हो गए। उनके शिष्यों द्वारा उन्हें गंगा में जल समाधि दी गई। शनिवार की रात में उन्होंने अपने शरीर का त्याग किया। रविवार की दोपहर उन्हें मठिया घाट पर गंगा में जल समाधि दी गई। संस्कृत के प्रकांड विद्वान योगेन्द्र गिरि वेदों और शास्त्रों के भी ज्ञाता थे। उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य धर्म का पालन किया। उनके गुरु सुदर्शन गिरि उन्हें चार वर्ष की अवस्था में उनके माता-पिता से मांग कर लाए थे।1990 में अपने गुरु के ब्रह्मलीन होने के बाद योगेन्द्र गिरि मठ के महंत बने। श्री गिरी भरौली इंटर कालेज के आजीवन अध्यक्ष रहे योगेन्द्र गिरि ने शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया। प्राथमिक एवं मीडिल स्कूल भरौली के लिए जमीन दान दी थी। महंत योगेन्द्र गिरि के सैकड़ों गांवों में हजारों शिष्य हैं। उनके ब्रह्मलीन होने की सूचना पर हजारों की संख्या में महिला पुरुष शिष्य आधी रात से ही उनके अंतिम दर्शन के लिए मठ पर आ गए थे। जल समाधि देने से पूर्व उन्हें एक सजे सजाए रथ पर गाजे बाजे के साथ पूरे गांव का भ्रमण कराया गया।अंतिम सफर में हजारों लोगों की भीड़ ओम नमः शिवाय और हर हर महादेव के नारे लगाते हुए साथ चल रही थी।

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