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हिंदी रंगमंच दिवस के अवसर पर तीस दिवसीय अभिनय प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन




पूर्वांचल राज्य ब्यूरो, बलिया  

बलिया। संकल्प साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था बलिया द्वारा तीस दिवसीय अभिनय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया है । इसका उद्घाटन 3 अप्रैल हिंदी रंगमंच दिवस के अवसर पर कलेक्ट्रेट स्थित ड्रामा हाल में किया गया। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के लोकपाल डॉ गणेश पाठक ने कहा कि अभिनय एक ऐसी कला है जिसको सीखने के बाद संपूर्ण व्यक्तित्व में निखार आता है। व्यक्तित्व विकसित करने का इससे बड़ा कोई माध्यम नहीं।  हमारे जनपद का सौभाग्य है कि संकल्प जैसी संस्था समय-समय पर इस तरह के आयोजन करती रहती है । इसमें अभिभावकों को अपने बच्चों को जरूर भेजना चाहिए।  कला प्रशिक्षक डॉक्टर इफ्तिखार खान ने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ हमारे जीवन में किसी ना किसी कला का होना बहुत जरूरी है।  इससे बच्चों के व्यक्तित्व में तो निखार आता  ही है उन्हें बहुमुखी होने का अवसर भी मिलता है ।अभिनय कला एक सशक्त माध्यम है जो हमारे संपूर्ण व्यक्तित्व को निखारता है। कार्यशाला के निदेशक वरिष्ठ रंगकर्मी  आशीष त्रिवेदी ने कहा की राष्ट्रीय नाट्य  विद्यालय वाराणसी से प्रशिक्षित  ट्विंकल गुप्ता कार्यशाला में बच्चों को प्रशिक्षित करेंगी। इसमें बच्चों को संवाद कौशल, भाव-भंगिमा, आंगिक अभिनय , मुखौटा निर्माण, फेस पेंटिंग, कविता पाठ इत्यादि का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण प्रति दिन सुबह 7 बजे से 9 बजे तक चलेगा। बलिया कलेक्ट्रेट स्थित ड्रामा हाल में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें 14 साल से 30 साल के लड़के लड़कियां प्रतिभाग कर सकते हैं। कार्यशाला के पहले दिन 20 प्रतिभागियों ने अपना रजिस्ट्रेशन करा लिया था। आशीष त्रिवेदी ने बताया कि 1868 में पहले हिंदी नाटक शीतला प्रसाद त्रिपाठी कृत जानकी मंगलम का मंचन वाराणसी में किया गया था इसलिए इस दिन को हिंदी रंगमंच दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर उन्होंने बलिया के समृद्धशाली रंग परम्परा की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बलिया का रंगमंच उतना ही पूराना है जितना कि हिंदी रंगमंच। 1884 में बलिया नाट्य समाज की स्थापना हो गई थी जिसके आमंत्रण पर स्वयं भारतेंदु हरिश्चंद्र ने बलिया ददरी मेले में सत्य  हरिश्चन्द्र नाटक का मंचन किया था। उन्होंने कहा कि विगत 20 वर्षों से संकल्प संस्था भारतेंदु हरिश्चंद्र और महान लोककलाकार भिखारी ठाकुर की रंग परम्परा को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। प्रशिक्षक ट्विंकल गुप्ता ने कहा कि मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में जो प्रशिक्षण मैंने प्राप्त किया है उसका प्रयोग मैं कार्यशाला में कर पाउंगी । उन्होंने कहा कि बलिया के रंगमंच को और अधिक समृद्ध करना हमारी प्राथमिकता है। यह कार्यशाला उसी कड़ी में एक प्रयास है। कार्यक्रम का संचालन आयूषी तिवारी ने किया आभार व्यक्त अरविंद गुप्ता ने किया।

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