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पीलीभीत के बिस्मिल्लाह होटल पर परोसा जा रहा खराब खाना

खाना खराब होने की शिकायत पर होटल संचालक झगड़े पर आमादा

खाद्य विभाग के जिम्मेदार होटलो से नहीं करते सेंपलिंग



पूर्वांचल राज्य ब्यूरो, पीलीभीत (ज़िला संवाददाता शबलू खा)

पैसा कमाने की होड़ में होटल संचालक खुलेआम लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। भीषण गर्मी में 1 से 2 दिन पुराने खराब हो चुके खाने को ग्राहकों के सामने परोसा जा रहा है। ग्राहकों द्वारा खाना खराब होने की शिकायत पर होटल संचालक झगड़ा फसाद पर आमादा हो जाते हैं। खाद्य महकमें के जिम्मेदारों द्वारा मुस्लिम होटल पर छापेमारी कर सैंपलिंग न किए जाने को लेकर खराब खाने की बिक्री का खेल खुलेआम खेला जा रहा है। जिस जन स्वास्थ्य पर सीधा हमला हो रहा है।

सरकार जहां खाद्य महकमें को निर्देशित करते हुए लगातार लोगों को ताजा एवं शुद्ध आहार ग्रहण कर स्वस्थ रहने का मूल मंत्र प्रदान करती रहती है। वहीं इसके उलट होटल संचालक खास तौर पर मुस्लिम होटल संचालक लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करते हुए अपनी पौबारह करने में जुटे हुए हैं। ऐसा ही एक मामला बीते दिन तब संज्ञान में आया जब तहसील कलीनगर क्षेत्र के गांव धरमंगदपुर निवासी चुन्नन खां अपने दो साथियों के साथ खाना खाने पीलीभीत के मोहल्ला भूरे खां स्थित बिस्मिल्लाह होटल पर खाना खाने पहुंचे। खाने का ऑर्डर देने पर जो भोजन परोसा गया वह खट्टा हो चुका था। इस बात की शिकायत करने पर पहले तो होटल चालक ने ग्राहक की एक न मानी उसके पश्चात दूसरी सब्जी परोस दी। उसमे भी बुलबुले उठ रहे थे। टेस्ट करने पर वह सब्ज़ी भी खट्टी थी। जब इस बात की शिकायत होटल संचालक से की गई तो वह लगातार खाना ताजा होने की बात कह कर नज़रें चुराता रहा। जब ग्राहक ने होटल संचालक से खाना स्वयं चखने की बात कही तो उसने खाना टेस्ट करने से इनकार कर दिया। यही नहीं दबंगी दिखाते हुए बिस्मिल्लाह होटल संचालक ने दोनों खराब सब्जियों का ग्राहक से पूरा भुगतान वसूल लिया। सीधे-साधे ग्राहक ने लड़ाई झगड़े से बचने के लिए 450 रुपए का भुगतान कर दिया। ग्राहक ने बताया कि वह इस मामले की शिकायत खाद्य निरीक्षक से करेगा। लेकिन ग्राहक ने यह भी संशय जताया कि यदि खाद्य महकमें से उक्त होटल से सैंपल लेकर जांच करने की बात कही जाए तो खाद्य निरीक्षक द्वारा शिकायतकर्ता को ही लैब का शुल्क अदा करने की बात कही जाएगी। बताते चने की खाद्य महकमें द्वारा आए दिन किराना व्यापारियों, मिष्ठान व्यापारियों आदि के यहां छापामार कार्रवाई की जाती है। लेकिन लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी मांसाहारी/शाकाहारी होटल से सैंपलिंग करने की स्वास्थ्य महकमा ज़हमत नहीं उठाता है। इसी का फायदा उठाते हुए होटल संचालक कई कई दिन पुराना बासी खाना ग्राहकों को परोस कर मोटा लाभ कमाते हैं। यदि समय रहते  खाद्य विभाग ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया तो लोगों के फूड प्वाइजनिंग का शिकार होने की घटनाओं में बढ़ोत्तरी होगी। यदि कोई अनहोनी होती है तो जन आक्रोश फैलने का जिम्मेदार स्वास्थ्य महकमा व जिला प्रशासन होगा। इस संबंध में जब वार्ता करने के लिए फूड कमिश्नर शशांक त्रिपाठी के मोबाइल पर संपर्क किया गया तो कई बार घंटी बजने के बावजूद उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।

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