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शंकराचार्य के समर्थन में उतरा यदुवंशी समाज

देशी गौमाता का पूजन कर निकाला पदयात्रा



पूर्वांचल राज्य ब्यूरो, वाराणसी (मुकेश पाण्डेय)

गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित कराने व गोकशी बंद कराने हेतु नंगे पांव वृंदावन से दिल्ली नंगे पांव पदयात्रा कर रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद: समर्थन में यदुवंशी समाज भी उतर गया है। आज रामनगर स्थित परोरवा गांव में भारी संख्या में एकत्र यदुवंशी समाज ने अजित कुमार यादव(बब्बू प्रधान)जिला पंचायत सदस्य के नेतृत्व में व पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी सजंय पाण्डेय के मार्गदर्शन में सविधि गौपूजन कर व पदयात्रा निकाल कर शंकराचार्य जी महाराज को अपना समर्थन प्रदान किया।गौपूजन के दौरान गौमाता के मूत्र विसर्जन करने पर उसे गौभक्तों ने हाथ मे लेकर अपने ऊपर छिड़काव कर गौमाता के प्रति अपने अप्रतिम भक्ति को प्रदर्शित किया।

पदयात्रा के पश्चात आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुए जिला पंचायत सदस्य अजित कुमार यादव(बब्बू प्रधान)ने कहा कि यदुवंशी समाज अनादि काल से गौवंश का पालन व सेवा करता चला आ रहा है।सर्वदेवमयी गौ माता के रक्षा हेतु यदुवंशी समाज शंकराचार्य जी महाराज के पावन सान्निध्य में अग्रणी भूमिका का निर्वहन करेगा।

धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए परोरवा ग्राम प्रधान रामेश्वर यादव ने कहा कि गौमाता का उपकार अगर मानव जाति अगर भूल जाएगा तो उसके अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो जाएगा।गौ के अपार महिमा और दैवीय गुणों के वर्णन से शास्त्र पुराण भरे पड़े हैं।

धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने कहा कि गाय का दूध बलवर्धक व रसायनयुक्त होता है, तथा उसमें माँ के दूध का समस्त गुण विद्यमान रहता है। गौमाता के रक्षा हेतु पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज कठिन तप कर रहे हैं।गौ माता का हर हाल में संरक्षण व संवर्धन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पोत्तन यादव जी व विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में गोपाल यादव व छांगुर यादव उपस्थित थे।

धर्म सभा की अध्यक्षता समाजसेवी सुजीत यादव ने व संचालन त्रिशूलधारी राकेश पाण्डेय ने किया।आगन्तुकों को आभार पं हरिनाथ दुबे ने किया।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सुनील उपाध्याय,सदानंद तिवारी, अनिल यादव, सोनू यादव, मोनू यादव, बिपिन यादव, दिनेश यादव, पिंटू यादव, सतीश विधायक, विकास यादव, दीनदयाल यादव आदि लोगों सहित सैकड़ों की संख्या में यदुवंशी समाज के लोग उपस्थित थे।

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